भूकंप से फिर हिली म्यांमार की धरती, भारत के इन राज्यों में भी महसूस हुए झटके; जानें कितनी रही तीव्रता

Spread the love

भूकंप 15 किलोमीटर की उथली गहराई पर आया और पूर्वोत्तर के कई शहरों में इसका जोरदार असर महसूस किया गया, हालांकि अभी तक किसी नुकसान की खबर नहीं है।

नई दिल्ली: म्यांमार में मंगलवार सुबह 4.7 तीव्रता का भूकंप आया। म्यांमार में आए इस भूकंप के झटके असम, मणिपुर और नागालैंड समेत भारत के कई पूर्वोत्तर राज्यों में महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप सुबह 6:10 बजे भारत-म्यांमार सीमा के पास आया। इसका केंद्र मणिपुर के उखरूल से सिर्फ 27 किमी दक्षिण-पूर्व में था। NCS ने बताया कि भूकंप का केंद्र जमीन से 15 किमी की गहराई में था। इसकी सटीक निर्देशांक अक्षांश 24.73 N और देशांतर 94.63 E पर दर्ज किए गए।

पूर्वोत्तर के शहरों से निकटता

भूकंप का केंद्र नागालैंड के वोखा से 155 किमी दक्षिण-दक्षिण-पूर्व, दीमापुर से 159 किमी दक्षिण-पूर्व और मोकोकचुंग से 177 किमी दक्षिण में था। मिजोरम के न्गोपा से 171 किमी उत्तर-पूर्व और चम्फाई से 193 किमी उत्तर-पूर्व में होने के कारण इसके झटके पूरे क्षेत्र में महसूस किए गए। भूकंप के झटकों से पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में लोगों में दहशत फैल गई, हालांकि, अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत होने की कोई खबर नहीं है। अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

इससे पहले, 21 सितंबर को भी मेघालय में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे, जब बांग्लादेश में 4 तीव्रता का भूकंप आया था। अधिकारियों ने बताया कि यह भूकंप भारतीय समयानुसार, सुबह 11:49 बजे मेघालय की बांग्लादेश सीमा के पास आया था। हालांकि, मेघालय में कोई नुकसान या हताहत होने की खबर नहीं थी।

क्षेत्र में हाल ही में हुई भूकंपीय गतिविधियां

यह भूकंप 14 सितंबर को म्यांमार में आए 4.6 तीव्रता के भूकंप के बाद आया है। ये दोनों झटके इस बात को दर्शाते हैं कि म्यांमार भूकंपीय गतिविधियों के प्रति कितना संवेदनशील है। म्यांमार चार टेक्टोनिक प्लेटों – भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेटों के चौराहे पर स्थित है, यही कारण है कि यहां बार-बार भूकंप आते हैं।

उच्च भूकंपीय जोखिम क्षेत्र

म्यांमार का 1,400 किलोमीटर लंबा सागाइंग फॉल्ट, सागाइंग, मंडले, बागो और यांगून सहित उन क्षेत्रों के लिए जोखिम को और बढ़ाता है, जहां देश की लगभग आधी आबादी रहती है। हालांकि, यांगून फॉल्ट लाइन से अपेक्षाकृत दूर है, लेकिन इसकी घनी आबादी इसे विशेष रूप से संवेदनशील बनाती है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 1903 के बागो भूकंप (7.0 तीव्रता) जैसे दूर के भूकंपों ने भी यांगून में काफी नुकसान पहुंचाया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *