अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर क्रैश हुआ तंजानिया का हेलीकॉप्टर, 5 लोगों की मौत

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तंजानिया के माउंट किलिमंजारो पर रेस्क्यू ऑपरेशन कर रहा एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। इससे हेलीकॉप्टर में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई।

दार एस सलाम (तंजानिया): अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर बुधवार शाम एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना का शिकार हो गया। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई। यह हेलीकॉप्टर मेडिकल इवैक्यूएशन मिशन पर था और पर्वत पर बीमार पर्यटकों को बचाने गया था। दुर्घटना पर्वत के लोकप्रिय क्लाइंबिंग रूट पर हुई, जहां हेलीकॉप्टर बाराफू कैंप और किबो समिट के बीच 4,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर क्रैश हो गया।

रेस्क्यू मिशन पर गया हेलीकॉप्टर खुद हो गया दुर्घटन का शिकार

चोटियों पर फंसे बीमार पर्यटकों को बचाने गया हेलीकॉप्टर खुद ही दुर्घटना का शिकार हो गया। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार यह क्रैश बाराफू वैली में लगभग 4,700 मीटर की ऊंचाई पर हुआ। हेलीकॉप्टर एयरबस AS350 B3 मॉडल का था, जो किलिमेडएयर (सवाना एविएशन लिमिटेड) द्वारा संचालित था। यह कंपनी किलिमंजारो पर मेडिकल इवैक्यूएशन सर्विस प्रदान करती है और पीक सीजन में रोजाना कई रेस्क्यू ऑपरेशन करती है।

इन लोगों की हुई मौत

मृतकों में दो विदेशी पर्यटक (चेक गणराज्य के प्लोस डेविड और प्लोसोवा अन्ना), एक स्थानीय टूर गाइड जिमी म्बागा, एक मेडिकल डॉक्टर जिमी डेनियल और जिम्बाब्वे के पायलट कॉन्सटेंटाइन माजोंडे शामिल हैं। ये पर्यटक ऊंचाई की वजह से होने वाली बीमारी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण रेस्क्यू किए जा रहे थे। क्रैश स्थल पर पहुंची रेस्क्यू टीमों में कोई जीवित नहीं बच पाया। किलिमंजारो क्षेत्रीय पुलिस कमांडर साइमन मैग्वा ने बताया कि हेलीकॉप्टर टेकऑफ के कुछ मिनट बाद ही क्रैश हो गया और आग लग गई। तंजानिया सिविल एविएशन अथॉरिटी ने जांच शुरू कर दी है, जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नियमों के अनुसार कारणों का पता लगाएगी। वहीं कंपनी ने अभी कोई बयान नहीं दिया है।

कितनी ऊंची है किलिमंजारो चोटी

माउंट किलिमंजारो चोटी 5,895 मीटर ऊंची है, हर साल लगभग 50,000 पर्यटकों को आकर्षित करती है। ऊंचाई की बीमारी (एल्टीट्यूड सिकनेस) यहां आम समस्या है, जिसके लिए हेलीकॉप्टर रेस्क्यू जरूरी होता है। ऐसे हादसे दुर्लभ हैं; आखिरी बड़ा हादसा नवंबर 2008 में हुआ था, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। यह घटना क्रिसमस के दिन हुई, जिसने पर्यटन जगत में शोक की लहर दौड़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचाई पर हवा पतली होने और मौसम की अनिश्चितता से ऐसे ऑपरेशन जोखिम भरे होते हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद कारण स्पष्ट होंगे।

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