Numerology: ये मूलांक दिलाता है बड़ी सफलता, बनाता है महाज्ञानी, संत प्रेमानंद महाराज हैं इसका सबसे बड़ा उदाहरण

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Premanand ji Maharaj Numerology: अंकज्योतिष शास्त्र अनुसार संत प्रेमानंद महाराज जिस मूलांक के जातक हैं उस मूलांक के लोग बेहद बुद्धिमान और अध्यात्मिक होते हैं। ऐसे लोगों पर ईश्वर की विशेष कृपा बरसती है।

Premanand ji Maharaj Numerology: भारत के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज का जन्म 30 मार्च 1969 में हुआ है। अंकज्योतिष अनुसार 30 तारीख में जन्मे लोगों का मूलांक 3 होता है। इस मूलांक का स्वामी गुरु यानी बृहस्पति ग्रह है। धर्म शास्त्रों में बृहस्पति देव को देवताओं के गुरु के रूप में पूजा जाता है। यही कारण है इस मूलांक में जन्मे लोग अत्यंत बुद्धिमान और दूसरों का मार्गदर्शन करने वाले होते हैं। चलिए आपको बताते हैं मूलांक 3 के लोगों का स्वभाव और विशेषताएं।

क्या है मूलांक 3?

जिन लोगों की जन्म तारीख 3, 12, 21 और 30 होती है उनका मूलांक 3 होता है। इस मूलांक के लोग बुद्धिमान, मेहनती, धार्मिक और दयालु स्वभाव के होते हैं। दूसरों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। संत प्रेमानंद महाराज का मूलांक भी 3 है इसलिए उनके व्यक्तित्व में गहन आध्यात्मिक ज्ञान, वाणी की शक्ति और गुरु तत्व स्पष्ट दिखाई देता है।

मूलांक 3 वालों की खासियत

  • मूलांक 3 वाले जातक बेहद तेज दिमाग के होते हैं।
  • इनकी एकाग्रता शक्ति काफी मजबूत होती है। यही कारण है कि ये अपने मार्ग से कभी नहीं भटकते।
  • इनकी वाणी काफी प्रभावशाली होती है जिस वजह से हर कोई इनका मुरीद हो जाता है।
  • ये पढ़ने-लिखने के काफी शौकीन होते हैं।
  • धार्मिक कार्यों में इनकी विशेष रुचि होती है।
  • ईश्वर से इनका खास जुड़ाव होता है।
  • इनके भीतर दूसरों का मार्गदर्शन करने की अद्भुत शक्ति होती है। यही कारण है कि ये लोग अक्सर प्रसिद्ध गुरु, संत, प्रवचनकर्ता, शिक्षक या विचारक बनते हैं। 

अध्यात्म के क्षेत्र में खूब प्रसिद्धि पाते हैं मूलांक 3 के जातक

देवगुरु बृहस्पति की कृपा के कारण ही मूलांक 3 वाले लोगों को शास्त्रों का गहन ज्ञान होता है। ये सत्य के मार्ग पर अडिग रहते हैं। यही वजह है कि ये लोग आध्यात्मिक क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल करते हैं और समाज में खूब सम्मान पाते हैं। इनकी वाणी में गजब का आकर्षण होता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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