संतान सुख और उसके सुख-सौभाग्य में वृद्धि का मिलेगा आशीर्वाद, छठ पूजा पर पढ़िए मां का गुणगान करने वाली ये आरती

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Chhath Mata ki Aarti: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी शिशु के जन्म से लेकर छह दिनों तक छठी माता उसकी रक्षा करती हैं। ब्रह्मा जी की मानस पुत्री देवसेना ही छठी मैया है, जिनका प्राकट्य प्रकृति के छठवें अंश से हुआ है, जिसके कारण इन्हें षष्ठी माता कहा जाता है। यहां पढ़िए छठी मैया की आरती के लिरिक्स।

Chhath Mata ki Aarti jai Chhath Maiya: लोक आस्था के महापर्व का आज तीसरा दिन है। हर साल कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि को इस पर्व की शुरुआत होती है। छठ पूजा षष्ठी देवी और सूर्य भगवान को समर्पित है। छठी मैया को बच्चों की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। सनातन धर्म में छठी मैया संतान सुख देने वाली और उसके सुख-सौभाग्य में वृद्धि करने वाली मानी गई हैं। छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, ओडिशा राज्यों का प्रमुख पर्व है।

छठी देवी की पूजा करने पर होती है सुख-सौभाग्य की प्राप्ति 

वहीं, अब इन जगहों से जुड़े लोग देश के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं, जिसके कारण लोक आस्था से जुड़ा यह पर्व देश के कोने-कोने में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। छठ पर्व के आते ही देश भर की पवित्र नदियों और जलाशयों के घाट पर छठी माता के गीत गुंजायमान होने लगते हैं। मान्यता है कि छठ पूजा के दिन विधि-विधान से छठी देवी की पूजा करने पर सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है और देवी से संतान की रक्षा का आशीर्वाद मिलता है। यहां पढ़िए छठी मैया का गुणगान करने वाली आरती।

Chhathi Maiya Ki Aarti: छठी माता की आरती

जय छठी मैया ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।। जय ।।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदिति होई ना सहाय।

ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए ।। जय ।।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय ।। जय ।।

अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडरराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।। जय ।।

ऊ जे सुहनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए ।। जय ।।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।। जय ।।

ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।। जय ।।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।

सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मंडराए।। जय ।।

मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।

ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।। जय ।।

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