5 Planets Vakri Rashifal: 11 नवंबर की शाम 06 बजकर 31 मिनट पर गुरु कर्क राशि में वक्री होने जा रहे हैं। वहीं शनि, बुध, राहु और केतु पहले से ही वक्री चाल चल रहे हैं। ऐसे में जानिए इन 5 ग्रहों का वक्री होना किन राशियों के लिए नकारात्मक साबित होने वाला है।

5 Planets Vakri Rashifal: देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि में हैं और आज यानी 11 नवंबर 2025 से ये इस राशि में अपनी वक्री चाल शुरू करने जा रहे हैं। ज्योतिष अनुसार गुरु का वक्री होना कुछ राशि वालों की जिंदगी में नई परेशानियां लेकर आ सकता है। वहीं ऊपर से बुध, शनि, राहु और केतु पहले से ही वक्री चाल चल रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र अनुसार इन पाचों ग्रहों का एक साथ वक्री होना 3 राशि वालों की मुश्किलें बढ़ा सकता है। चलिए जानते हैं ये कौन सी राशियां हैं।
मेष राशि (Aries)
पांच ग्रहों के वक्री होने से मेष राशि वालों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। इस अवधि में धन हानि की आशंका है। बिजनेस में तगड़ा नुकसान हो सकता है। प्रेम जीवन में भी दिक्कतें आ सकती हैं। इस दौरान अपनी वाणी पर संयम बरतें नहीं तो रिश्तों में खटास आ सकती है। आर्थिक स्थिति बिगड़ने के आसार हैं। सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
क्या करें उपाय: मेष राशि वाले प्रतिदिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं। साथ ही मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे ग्रहों की वक्री चाल का बुरा प्रभाव कम हो जाएगा।
तुला राशि (Libra)
पांच ग्रहों की वक्री चाल तुला राशि वालों को सेहत से जुड़ी परेशानियां दे सकती हैं। अचानक से तबीयत खराब होने के आसार हैं। आपका कोई पुराना रोग फिर से उभर सकता है। इस दौरान आपकी वाणी दूसरों को कष्ट पहुंचाने का काम करेगी। जिसके कारण आपकी कई संबंधों में खटास आने की आशंका है। इसलिए अपनी वाणी पर संयम बरतें। इसके अलावा धन संबंधी फैसले सोच समझकर लें।
क्या करें उपाय: जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्रों का दान करें। प्रत्येक सोमवार शिव चालीसा का पाठ करें।
मीन राशि (Pisces)
ग्रहों की वक्री चाल मीन राशि वालों की आर्थिक स्थिति खराब कर सकती है। अचानक खर्च बढ़ सकते हैं। सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है। कर्ज का बोझ बढ़ सकता है। कार्यस्थल पर कोई आपकी छवि बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं।
क्या करें उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। शिवलिंग पर बेलपत्र और धतूरा जरूर चढ़ाएं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।